संसार एक उलटा पीपल का पेड़ है — जड़ें ऊपर (ब्रह्म), शाखाएँ नीचे (लोक), छन्द (वेद) उसके पत्ते। यह अध्याय इसी रूपक से शुरू होता है।
15.7 में जीव को परमात्मा का सनातन अंश बताया गया है। 15.14 का “अहं वैश्वानरो भूत्वा” श्लोक भोजन से पहले रोज़ बहुत घरों में पढ़ा जाता है। 15.15 कहता है — मैं सबके हृदय में बैठा हूँ। अंत में क्षर, अक्षर और पुरुषोत्तम — तीन पुरुषों का वर्णन और परमात्मा का “पुरुषोत्तम” नाम।