कुरुक्षेत्र की रणभूमि में, जब अर्जुन अपने ही परिजनों को सामने देखकर विषाद में डूब गए, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें जीवन का परम ज्ञान दिया। यही संवाद श्रीमद्भगवद्गीता है — 18 अध्यायों में कर्म, भक्ति, ज्ञान और मोक्ष का मार्ग।
यहाँ प्रत्येक अध्याय के प्रमुख श्लोकों का मूल संस्कृत पाठ, शब्द-दर-शब्द अर्थ और सरल हिन्दी व्याख्या दी गई है।