📕 भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता

महाभारत — भीष्म पर्व 18 अध्याय · 700 श्लोक उपलब्ध
📖 महाभारत — भीष्म पर्व, अध्याय 25–42

कुरुक्षेत्र की रणभूमि में, जब अर्जुन अपने ही परिजनों को सामने देखकर विषाद में डूब गए, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें जीवन का परम ज्ञान दिया। यही संवाद श्रीमद्भगवद्गीता है — 18 अध्यायों में कर्म, भक्ति, ज्ञान और मोक्ष का मार्ग।

यहाँ प्रत्येक अध्याय के प्रमुख श्लोकों का मूल संस्कृत पाठ, शब्द-दर-शब्द अर्थ और सरल हिन्दी व्याख्या दी गई है।

अध्याय 1 — अर्जुनविषादयोग
अर्जुन का विषाद — 47 श्लोक · पूरा अध्याय
अध्याय 2 — सांख्ययोग
आत्मा की अमरता, कर्तव्य, स्थितप्रज्ञ — 72 श्लोक · पूरा अध्याय
अध्याय 3 — कर्मयोग
निष्काम कर्म की महिमा — 43 श्लोक · पूरा अध्याय
अध्याय 4 — ज्ञानकर्मसंन्यासयोग
भगवान के अवतार का रहस्य — 42 श्लोक · पूरा अध्याय
अध्याय 5 — कर्मसंन्यासयोग
कर्मयोग और संन्यास — 29 श्लोक · पूरा अध्याय
अध्याय 6 — आत्मसंयमयोग
ध्यान और योग की विधि — 47 श्लोक · पूरा अध्याय
अध्याय 7 — ज्ञानविज्ञानयोग
भगवान की प्रकृति और माया — 30 श्लोक · पूरा अध्याय
अध्याय 8 — अक्षरब्रह्मयोग
ब्रह्म और अध्यात्म — 28 श्लोक · पूरा अध्याय
अध्याय 9 — राजविद्याराजगुह्ययोग
सबसे गोपनीय ज्ञान — 34 श्लोक · पूरा अध्याय
१०
अध्याय 10 — विभूतियोग
भगवान की विभूतियाँ — 42 श्लोक · पूरा अध्याय
११
अध्याय 11 — विश्वरूपदर्शनयोग
भगवान का विराट रूप — 55 श्लोक · पूरा अध्याय
१२
अध्याय 12 — भक्तियोग
भक्ति का मार्ग — 20 श्लोक · पूरा अध्याय
१३
अध्याय 13 — क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग
शरीर और आत्मा का भेद — 34 श्लोक · पूरा अध्याय
१४
अध्याय 14 — गुणत्रयविभागयोग
सत्त्व, रजस् और तमस् — 27 श्लोक · पूरा अध्याय
१५
अध्याय 15 — पुरुषोत्तमयोग
संसार रूपी अश्वत्थ वृक्ष — 20 श्लोक · पूरा अध्याय
१६
अध्याय 16 — दैवासुरसम्पद्विभागयोग
दैवी और आसुरी सम्पदा — 24 श्लोक · पूरा अध्याय
१७
अध्याय 17 — श्रद्धात्रयविभागयोग
तीन प्रकार की श्रद्धा — 28 श्लोक · पूरा अध्याय
१८
अध्याय 18 — मोक्षसंन्यासयोग
गीता का सार — 78 श्लोक · पूरा अध्याय