भक्ति का मार्ग — भगवान को सबसे प्रिय भक्त कौन है? जो सबसे मैत्री रखता है, करुणा रखता है और अहंकार से मुक्त है।
यह अध्याय अर्जुन के एक सीधे प्रश्न से शुरू होता है — सगुण भक्त बेहतर है या निर्गुण उपासक? कृष्ण इसका उत्तर देते हैं, फिर भक्ति का व्यावहारिक मार्ग बताते हैं — मन न लगे तो अभ्यास, अभ्यास न हो तो भगवान के लिए कर्म, वह भी न हो तो फल-त्याग। अंत में 12.13 से 12.20 तक उन भक्तों के लक्षण बताए गए हैं जो भगवान को सबसे प्रिय हैं।