यह 12.6 का सीधा जवाब है। जो भक्त सब कर्म कृष्ण को सौंप देते हैं और अनन्य भाव से ध्यान करते हैं — कृष्ण कहते हैं — उनके लिए मैं स्वयं मृत्यु और संसार के इस सागर से उद्धार करने वाला बन जाता हूँ। और यह जल्दी करता हूँ — देर नहीं लगाता।
'न चिरात्' — यानी शीघ्र। यह शब्द बहुत प्यारा है। जैसे एक दादा अपने पोते की पुकार सुनते ही दौड़ पड़ते हैं, वैसे ही कृष्ण भक्त की पुकार पर देर नहीं करते।