यह 12.13 के बाद भक्त-लक्षण श्रृंखला का अगला श्लोक है। कृष्ण यहाँ चार लक्षण बताते हैं — सदा संतुष्ट, आत्म-संयमी, दृढ़ निश्चय वाला, और मन-बुद्धि मुझे अर्पित किए हुए। ऐसा भक्त मुझे प्रिय है।
सदा संतुष्ट का अर्थ है — जो मिला, उसमें खुश। जैसे एक बुज़ुर्ग दादी जो चाहे घर हो या झोपड़ी, भोजन मिले या कम — मन से तृप्त रहती हैं। दृढ़ निश्चय का अर्थ है — जो ठाना, उससे न हटना। इन दोनों का मेल जिसमें है, और जिसका मन-बुद्धि कृष्ण को अर्पित है — वह भक्त कृष्ण को अत्यंत प्रिय है।