कृष्ण जानते हैं कि हर कोई पहले ही प्रयास में मन को स्थिर नहीं कर सकता। इसलिए दूसरी सीढ़ी देते हैं — यदि मन मुझमें स्थिर नहीं होता, तो अभ्यास योग से प्रयास करो। बार-बार लगाओ, बार-बार लौटाओ — यही अभ्यास है।
जैसे एक बच्चा साइकिल चलाना सीखता है — पहले गिरता है, फिर उठता है, फिर कोशिश करता है। धीरे-धीरे संतुलन आ जाता है। वैसे ही मन को बार-बार कृष्ण की ओर लौटाना — यही अभ्यास योग है।