📿 श्लोक संग्रह

श्री रुद्रम्

यजुर्वेद, तैत्तिरीय संहिता
📖 यजुर्वेद, तैत्तिरीय संहिता

श्री रुद्रम् यजुर्वेद की तैत्तिरीय संहिता का एक अत्यंत पवित्र सूक्त है। इसके दो भाग हैं — नमकम् (11 अनुवाक) और चमकम् (11 अनुवाक)। नमकम् में भगवान रुद्र (शिव) को नमस्कार किया गया है और चमकम् में 'च मे' (और मुझे मिले) शैली में ईश्वर से समस्त कल्याण की प्रार्थना है। यहाँ प्रत्येक अनुवाक का मूल संस्कृत पाठ, शब्द-दर-शब्द अर्थ और सरल हिन्दी व्याख्या दी गई है।

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नमकम् — अनुवाक 1
रुद्र-वंदना, अस्त्र-शान्ति, सौम्य रूप की प्रार्थना
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नमकम् — अनुवाक 2
दिशापति, पशुपति, क्षेत्रपति — रुद्र के स्वामित्व
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नमकम् — अनुवाक 3
शम्भु, शंकर, शिव — कल्याणकारी नाम
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नमकम् — अनुवाक 4
गणपति, व्रातपति, विश्वरूप — रुद्रगण वंदना
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नमकम् — अनुवाक 5
शिल्पकार, सारथि, वनवासी — समाज में रुद्र
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नमकम् — अनुवाक 6
भव, रुद्र, शर्व, पशुपति — अष्टमूर्ति नाम
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नमकम् — अनुवाक 7
नीलकण्ठ, कपर्दी, सहस्राक्ष, गिरिश
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नमकम् — अनुवाक 8
हिरण्यमय स्वरूप, सेनानायक, ईशान
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नमकम् — अनुवाक 9
ह्रस्व-बृहत्, वृद्ध-नवीन — विरोधी रूपों में एकत्व
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नमकम् — अनुवाक 10
सौम्य-उग्र, संहारक-तारक — विविध भाव
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नमकम् — अनुवाक 11
महामृत्युञ्जय मन्त्र, सर्वव्यापक रुद्र, समापन
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चमकम् — अनुवाक 1
बल, बुद्धि, प्राण, इन्द्रियाँ — 'च मे' प्रारम्भ
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चमकम् — अनुवाक 2
दूध, घी, कृषि, वर्षा, धन — भौतिक समृद्धि
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चमकम् — अनुवाक 3
शान्ति, सुख, यश, धन, ज्ञान, सन्तान
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चमकम् — अनुवाक 4
ऋत, सत्य, श्रद्धा, तेज, अग्नि-अर्पण
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चमकम् — अनुवाक 5
विषम संख्याएँ (1–33) — यज्ञ-इष्टका गणना
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चमकम् — अनुवाक 6
सम संख्याएँ (4–48) — यज्ञ-वेदी गणना
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चमकम् — अनुवाक 7
समिधा, वेदी, स्रुचा, सोम — यज्ञ उपकरण
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चमकम् — अनुवाक 8
अग्नि, इन्द्र, विष्णु, सरस्वती — देव-कृपा
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चमकम् — अनुवाक 9
दिशाएँ, सूर्य-चन्द्र, धातुएँ — प्रकृति-सामंजस्य
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चमकम् — अनुवाक 10
पत्थर, पर्वत, वन, धातुएँ — भौतिक तत्त्व
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चमकम् — अनुवाक 11
धन, कर्म, सद्गति, ॐ शान्तिः — समापन