📿 श्री रुद्रम्

नमकम् — अनुवाक 10

श्री रुद्रम् · 10 / 22
📖 यजुर्वेद, तैत्तिरीय संहिता
मन्त्र 1
नमः सोमाय च रुद्राय च ।
सोमाय
सौम्य (शान्त) रूप वाले को
रुद्राय
रुद्र (उग्र) रूप वाले को
सौम्य और उग्र दोनों रूपों वाले रुद्र को नमस्कार है।
मन्त्र 2
नमस्ताम्राय चारुणाय च ।
ताम्राय
ताम्रवर्ण (लाल) वाले को
अरुणाय
अरुणवर्ण वाले को
ताम्रवर्ण और अरुणवर्ण वाले रुद्र को नमस्कार है।
मन्त्र 3
नमः शंगाय च पशुपतये च ।
शंगाय
सुख देने वाले को
पशुपतये
पशुपति (प्राणियों के स्वामी) को
सुख देने वाले और पशुपति (समस्त प्राणियों के स्वामी) रुद्र को नमस्कार है।
मन्त्र 4
नमो उग्राय च भीमाय च ।
उग्राय
उग्र रूप वाले को
भीमाय
भयंकर रूप वाले को
उग्र और भयंकर रूप वाले रुद्र को नमस्कार है।
मन्त्र 5
नमोऽग्रेवधाय च दूरेवधाय च ।
अग्रेवधाय
सामने से वध करने वाले को
दूरेवधाय
दूर से वध करने वाले को
सामने से और दूर से शत्रुओं का संहार करने वाले रुद्र को नमस्कार है।
मन्त्र 6
नमो हन्त्रे च हनीयसे च ।
हन्त्रे
संहार करने वाले को
हनीयसे
अधिक संहार करने वाले को
संहार करने वाले और अत्यधिक संहार करने में सक्षम रुद्र को नमस्कार है।
मन्त्र 7
नमो वृक्षेभ्यो हरिकेशेभ्यो नमस्ताराय ।
वृक्षेभ्यः
वृक्षरूप शिव को
हरिकेशेभ्यः
हरित पत्तियों वाले को
ताराय
तारने वाले (उद्धारकर्ता) को
वृक्षरूप, हरित पत्तियों वाले और भवसागर से तारने वाले रुद्र को नमस्कार है।

दसवें अनुवाक में रुद्र के सौम्य-उग्र, ताम्र-अरुण वर्ण, हन्ता और तारक — इन विविध भावों से प्रणाम है। रुद्र संहारक भी हैं और उद्धारक भी।

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