आठवें अनुवाक में प्रमुख वैदिक देवताओं — अग्नि, इन्द्र, सोम, विष्णु, सरस्वती, बृहस्पति आदि — और तीनों लोकों की कृपा माँगी गई है।
📖 यजुर्वेद, तैत्तिरीय संहिता
मन्त्र 1
अग्निश्च मे इन्द्रश्च मे सोमश्च मे ।
अग्निः
अग्नि देव
इन्द्रः
इन्द्र देव
सोमः
सोम देव
मुझे अग्नि, इन्द्र और सोम देवताओं की कृपा मिले।
मन्त्र 2
इन्द्राग्नी च मे सविता च मे सरस्वती च मे ।
इन्द्राग्नी
इन्द्र और अग्नि
सविता
सवितृ (सूर्य) देव
सरस्वती
सरस्वती देवी
इन्द्र-अग्नि, सवितृ और सरस्वती देवी — इन सबकी कृपा मुझ पर हो।
मन्त्र 3
पूषा च मे बृहस्पतिश्च मे मित्रश्च मे वरुणश्च मे ।
पूषा
पूषण (पोषक) देव
बृहस्पतिः
बृहस्पति (देवगुरु)
मित्रः
मित्र देव
वरुणः
वरुण देव
पूषण, बृहस्पति, मित्र और वरुण — इन देवताओं की कृपा मुझे मिले।
मन्त्र 4
त्वष्टा च मे धाता च मे विष्णुश्च मे ।
त्वष्टा
त्वष्टा (शिल्पी) देव
धाता
धाता (विधाता) देव
विष्णुः
विष्णु देव
त्वष्टा, धाता और विष्णु — इन देवताओं की कृपा मुझ पर हो।
मन्त्र 5
अश्विनौ च मे मरुतश्च मे विश्वे च मे देवाः ।
अश्विनौ
अश्विनीकुमार (दो देव-वैद्य)
मरुतः
मरुत (वायु) देव
विश्वे देवाः
समस्त देवता
अश्विनीकुमार, मरुतगण और समस्त देवताओं की कृपा मुझ पर हो।
मन्त्र 6
पृथिवी च मेऽन्तरिक्षं च मे द्यौश्च मे ।
पृथिवी
पृथ्वी
अन्तरिक्षम्
अन्तरिक्ष (आकाश)
द्यौः
स्वर्गलोक
पृथ्वी, अन्तरिक्ष और स्वर्गलोक — ये तीनों लोक मुझे अनुकूल हों।
संदर्भ
श्री रुद्रम् · 19 / 22