📿 श्री रुद्रम्

चमकम् — अनुवाक 9

श्री रुद्रम् · 20 / 22
📖 यजुर्वेद, तैत्तिरीय संहिता
मन्त्र 1
दिशश्च मे अग्निश्च मे सूर्यश्च मे चन्द्रमाश्च मे ।
दिशः
दिशाएँ
अग्निः
अग्नि
सूर्यः
सूर्य
चन्द्रमाः
चन्द्रमा
दिशाएँ, अग्नि, सूर्य और चन्द्रमा — ये सब मुझे अनुकूल हों।
मन्त्र 2
नक्षत्राणि च मे भूमिश्च मेऽन्तरिक्षं च मे ।
नक्षत्राणि
नक्षत्र (तारे)
भूमिः
भूमि (पृथ्वी)
अन्तरिक्षम्
अन्तरिक्ष
नक्षत्र, भूमि और अन्तरिक्ष — ये सब मुझे अनुकूल हों।
मन्त्र 3
आपश्च मे ओषधयश्च मे वनस्पतयश्च मे ।
आपः
जल
ओषधयः
औषधियाँ
वनस्पतयः
वनस्पतियाँ
जल, औषधियाँ और वनस्पतियाँ — ये सब मुझे अनुकूल हों।
मन्त्र 4
पशवश्च मे हिरण्यं च मे अयश्च मे ।
पशवः
पशु
हिरण्यम्
सोना
अयः
लोहा
पशुधन, सोना और लोहा — ये सब मुझे प्राप्त हों।
मन्त्र 5
सीसं च मे त्रपुश्च मे शीशं च मे लोहं च मे ।
सीसम्
सीसा (लेड)
त्रपुः
टिन (रांगा)
शीशम्
शीशा (काँच)
लोहम्
ताँबा
सीसा, टिन, काँच और ताँबा — ये सब धातुएँ मुझे मिलें।
मन्त्र 6
अग्निश्च म आपश्च मे वीरुधश्च म ओषधयश्च मे ।
अग्निः
अग्नि
आपः
जल
वीरुधः
लताएँ
ओषधयः
औषधियाँ
अग्नि, जल, लताएँ और औषधियाँ — ये सब मुझे अनुकूल हों।

नौवें अनुवाक में ब्रह्माण्डीय तत्त्वों — दिशाएँ, सूर्य-चन्द्र, नक्षत्र, जल, औषधि, धातुएँ — की प्रार्थना है। यह सम्पूर्ण प्रकृति से सामंजस्य का वैदिक आदर्श है।

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