📿 श्री रुद्रम्

नमकम् — अनुवाक 3

श्री रुद्रम् · 3 / 22
📖 यजुर्वेद, तैत्तिरीय संहिता
मन्त्र 1
नमः शम्भवाय च मयोभवाय च ।
शम्भवाय
सुख देने वाले को
मयोभवाय
आनन्द उत्पन्न करने वाले को
सुख प्रदान करने वाले और आनन्द उत्पन्न करने वाले रुद्र को नमस्कार है।
मन्त्र 2
नमः शंकराय च मयस्कराय च ।
शंकराय
कल्याण करने वाले को
मयस्कराय
आनन्द करने वाले को
कल्याण करने वाले और आनन्द प्रदान करने वाले रुद्र को नमस्कार है।
मन्त्र 3
नमः शिवाय च शिवतराय च ।
शिवाय
मंगलकारी को
शिवतराय
अत्यंत मंगलकारी को
मंगलकारी और अत्यंत मंगलकारी रुद्र को नमस्कार है।
मन्त्र 4
नमस्तीर्थ्याय च कूल्याय च ।
तीर्थ्याय
तीर्थों में निवास करने वाले को
कूल्याय
नदी तटों पर रहने वाले को
तीर्थों में और नदी तटों पर निवास करने वाले रुद्र को नमस्कार है।
मन्त्र 5
नमः पार्याय चावार्याय च ।
पार्याय
पार (दूसरे तट) पर रहने वाले को
अवार्याय
इस तट पर रहने वाले को
नदी के दूसरे तट पर और इस तट पर — दोनों ओर रहने वाले रुद्र को नमस्कार है।
मन्त्र 6
नमः प्रतरणाय चोत्तरणाय च ।
प्रतरणाय
पार ले जाने वाले को
उत्तरणाय
ऊपर उठाने वाले को
भवसागर से पार ले जाने वाले और ऊपर उठाने वाले रुद्र को नमस्कार है।

तृतीय अनुवाक में रुद्र के कल्याणकारी नामों की स्तुति है — शम्भु, शंकर, शिव आदि। साथ ही उनकी सर्वव्यापकता बताई गई है — वे तीर्थों, नदी तटों, दोनों ओर विराजमान हैं।

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