📿 श्री रुद्रम्

चमकम् — अनुवाक 2

श्री रुद्रम् · 13 / 22
📖 यजुर्वेद, तैत्तिरीय संहिता
मन्त्र 1
इष्टकाश्च मे उर्जाश्च मे पयश्च मे रसश्च मे ।
इष्टकाः
इष्ट वस्तुएँ
ऊर्जा
ऊर्जा (बल)
पयः
दूध
रसः
रस (आनन्द)
मुझे इष्ट वस्तुएँ, ऊर्जा, दूध और रस (आनन्द) मिले।
मन्त्र 2
घृतं च मे मधु च मे सगधिश्च मे ।
घृतम्
घी
मधु
मधु (शहद)
सगधिः
सुगन्धित पदार्थ
मुझे घी, मधु और सुगन्धित पदार्थ मिलें।
मन्त्र 3
सपीतिश्च मे कृषिश्च मे वृष्टिश्च मे ।
सपीतिः
सहभोजन
कृषिः
कृषि (खेती)
वृष्टिः
वर्षा
मुझे सहभोजन का सुख मिले, कृषि सफल हो और समय पर वर्षा हो।
मन्त्र 4
जैत्रं च म औद्भिद्यं च मे रयिश्च मे रायश्च मे ।
जैत्रम्
विजय
औद्भिद्यम्
उत्पादन शक्ति
रयिः
धन
रायः
सम्पत्ति
मुझे विजय मिले, उत्पादन शक्ति मिले, धन और सम्पत्ति मिले।
मन्त्र 5
पुष्टं च मे पोषश्च मे बहु च मे भूयश्च मे ।
पुष्टम्
पुष्टता
पोषः
पोषण
बहु
बहुत
भूयः
और अधिक
मुझे पुष्टता और पोषण मिले, बहुत मिले और और अधिक मिले।
मन्त्र 6
पूर्णं च मे पूर्णतरं च मे आकूतिश्च मे ।
पूर्णम्
पूर्णता
पूर्णतरम्
अधिक पूर्णता
आकूतिः
संकल्प
मुझे पूर्णता मिले, अधिक पूर्णता मिले और संकल्प शक्ति मिले।

चमकम् के द्वितीय अनुवाक में भौतिक समृद्धि — दूध, घी, मधु, कृषि, वर्षा, धन, पोषण — की प्रार्थना है। वैदिक दृष्टि में भौतिक और आध्यात्मिक दोनों समृद्धि ईश्वर से माँगी जाती है।

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