📿 श्री रुद्रम्

नमकम् — अनुवाक 7

श्री रुद्रम् · 7 / 22
📖 यजुर्वेद, तैत्तिरीय संहिता
मन्त्र 1
नमो दुन्दुभ्याय चाहनन्याय च ।
दुन्दुभ्याय
दुन्दुभि (नगाड़ा) बजाने वाले को
आहनन्याय
वाद्य बजाने वाले को
दुन्दुभि (नगाड़ा) और वाद्य बजाने वाले रुद्र को नमस्कार है।
मन्त्र 2
नमो ध्रष्णवे च प्रमृशाय च ।
ध्रष्णवे
साहसी को
प्रमृशाय
स्पर्श करने वाले (अनुग्रहकारी) को
साहसी और अनुग्रहकारी स्पर्श वाले रुद्र को नमस्कार है।
मन्त्र 3
नमो नीलग्रीवाय च शितिकण्ठाय च ।
नीलग्रीवाय
नीले कंठ वाले (नीलकण्ठ) को
शितिकण्ठाय
श्वेत कंठ वाले को
नीले कंठ वाले (विष धारण करने वाले) और श्वेत कंठ वाले रुद्र को नमस्कार है।
मन्त्र 4
नमः कपर्दिने च व्युप्तकेशाय च ।
कपर्दिने
जटाधारी को
व्युप्तकेशाय
मुण्डित केशों वाले को
जटाजूट धारण करने वाले और मुण्डित शीर्ष वाले — दोनों रूपों में विद्यमान रुद्र को नमस्कार है।
मन्त्र 5
नमः सहस्राक्षाय च शतधन्वने च ।
सहस्राक्षाय
सहस्र नेत्रों वाले को
शतधन्वने
सौ धनुषों वाले को
सहस्र नेत्रों वाले और सौ धनुष धारण करने वाले रुद्र को नमस्कार है।
मन्त्र 6
नमो गिरिशाय च शिपिविष्टाय च ।
गिरिशाय
पर्वत पर निवास करने वाले को
शिपिविष्टाय
किरणों में व्याप्त को
पर्वत पर विराजमान और सूर्य-किरणों में व्याप्त रुद्र को नमस्कार है।

सातवें अनुवाक में रुद्र के प्रसिद्ध रूपों — नीलकण्ठ, कपर्दी (जटाधारी), सहस्राक्ष, गिरिश — का वर्णन है। यहाँ विरोधी गुणों (जटाधारी व मुण्डित) में एक ही ईश्वर को देखने की दृष्टि है।

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