दुर्गा सप्तशती मार्कंडेय पुराण का अंश है। इसमें 13 अध्यायों में देवी दुर्गा की महिमा, उनके विभिन्न अवतारों की कथाएँ और दैत्यों पर उनकी विजय का वर्णन है। यहाँ प्रत्येक अध्याय का मूल संस्कृत पाठ, शब्द-दर-शब्द अर्थ और सरल हिन्दी व्याख्या दी गई है।
📖 मार्कंडेय पुराण — दुर्गा सप्तशती
अध्याय
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प्रथम अध्याय — मधु-कैटभ वध
योगनिद्रा, ब्रह्मा स्तुति, मधु-कैटभ का अंत
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द्वितीय अध्याय — महिषासुर सैन्य वध
देवी प्रकटना, अस्त्र-अर्पण, सिंहनाद
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तृतीय अध्याय — महिषासुर वध
महिषासुर के अनेक रूप, त्रिशूल प्रहार, जय-जयकार
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चतुर्थ अध्याय — शक्रादि स्तुति
या देवी सर्वभूतेषु, सर्वमंगलमांगल्ये
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पञ्चम अध्याय — देवी-दूत संवाद
शुम्भ का दूत, देवी की प्रतिज्ञा
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षष्ठ अध्याय — धूम्रलोचन वध
एक हुंकार से भस्म, चण्ड-मुण्ड प्रेषण
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सप्तम अध्याय — चण्ड-मुण्ड वध
माँ काली प्रकटना, चामुण्डा नाम
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अष्टम अध्याय — रक्तबीज वध
रक्त की बूँदें, चामुण्डा की रणनीति
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नवम अध्याय — निशुम्भ वध
त्रिशूल प्रहार, पुष्पवृष्टि, वरदान
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दशम अध्याय — शुम्भ वध
एकैवाहं जगत्यत्र, सभी शक्तियाँ एक
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एकादश अध्याय — नारायणी स्तुति
शरणागत रक्षा, भविष्यवाणी, नंद-यशोदा
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द्वादश अध्याय — देवी का वरदान
महात्म्य-महिमा, देवी अंतर्धान
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त्रयोदश अध्याय — सुरथ-वैश्य उपाख्यान
राजा सुरथ, वैश्य समाधि, उपसंहार