📖 मार्कंडेय पुराण — दुर्गा सप्तशती
श्लोक 1
शुम्भ उवाच ।
गच्छ धूम्रलोचनाशु त्वं देवीं आनय सत्वरम् ।
बलात् प्रगृह्य केशेषु आनयस्व मदान्तिकम् ॥
शुम्भ ने धूम्रलोचन को आदेश दिया — जाओ और देवी को बलपूर्वक मेरे पास ले आओ।
श्लोक 2
स तथेत्युक्त्वा दैत्येन्द्रं प्रयातो बलसंयुतः ।
देवीं हिमवतः पार्श्वे ददर्श सुरसत्तमाम् ॥
तथेति उक्त्वा
ऐसा ही होगा कहकर
प्रयातः बलसंयुतः
सेना लेकर चला
हिमवतः पार्श्वे
हिमालय के निकट
सुरसत्तमाम्
देवताओं में श्रेष्ठ देवी को
धूम्रलोचन सेना लेकर हिमालय के निकट पहुँचा। वहाँ उसने देवी को देखा।
श्लोक 3
देव्युवाच ।
किमर्थमागतो दूत दैत्येन्द्रेण प्रेरितः ।
ब्रूहि सत्यं त्वमेवाद्य को ऽयं शुम्भः किमात्मकः ॥
किमर्थम् आगतः
किस उद्देश्य से आया
दैत्येन्द्रेण प्रेरितः
दैत्यराज द्वारा भेजा गया
कः अयं शुम्भः
यह शुम्भ कौन है
देवी ने धूम्रलोचन से पूछा — हे दूत, शुम्भ ने तुम्हें किस उद्देश्य से भेजा है? सच बताओ।
श्लोक 4
धूम्रलोचन उवाच ।
आगच्छ शुम्भस्य गृहं मत्तेभगामिनि ।
अन्यथा बलमाहृत्य नेष्यामि त्वां महाभुज ॥
शुम्भस्य गृहम्
शुम्भ के पास
मत्तेभगामिनि
मस्त हाथी जैसी चाल वाली
धूम्रलोचन ने कहा — हे देवी, शुम्भ के पास चलो। अन्यथा बलपूर्वक ले जाऊँगा।
श्लोक 5
देव्युवाच ।
दैत्येन्द्रेण प्रहितो ऽसि बलवान् दानवः स्वयम् ।
बलेन यदि मां नेतुमुत्सहसे तदा कुरु ॥
दैत्येन्द्रेण प्रहितः
दैत्यराज द्वारा भेजे गए
नेतुम् उत्सहसे
ले जाने में सक्षम हो
देवी ने शांति से कहा — तुम बलशाली हो। यदि बल से ले जा सकते हो तो प्रयास करो।
श्लोक 6
इत्युक्तः स तु देव्या वै हुंकारेणैव चण्डिका ।
भस्मसात् कृतवान् धूम्रलोचनो महासुरम् ॥
भस्मसात् कृतवान्
भस्म कर दिया
धूम्रलोचनः महासुरः
धूम्रलोचन महादैत्य
देवी चण्डिका की एक हुंकार से धूम्रलोचन भस्म हो गया।
श्लोक 7
हताश्च तद्बलाश्चैव सिंहनादेन चण्डिकाः ।
जगुः स्तोत्रं महादेव्या देवाः सर्वे महर्षयः ॥
हताः तद्बलाः
उसकी सेना भी परास्त हुई
सिंहनादेन चण्डिका
देवी चण्डिका के सिंहनाद से
जगुः स्तोत्रम्
स्तुति गाने लगे
धूम्रलोचन की सेना भी परास्त हुई। देवताओं और ऋषियों ने देवी की स्तुति की।
श्लोक 8
शुम्भो ऽपि तत् प्राप्य परां विषादमासादितः क्रुद्धः ।
प्रेषयामास चण्डं च मुण्डं सेनापती तदा ॥
परां विषादम्
अत्यंत दुःख में
चण्डम् च मुण्डम्
चण्ड और मुण्ड को
यह समाचार सुनकर शुम्भ क्रोधित हुआ। उसने अपने दो सेनापति — चण्ड और मुण्ड — को देवी के पास भेजा।
संदर्भ
मार्कंडेय पुराण के अनुसार, षष्ठ अध्याय में धूम्रलोचन वध की कथा है। शुम्भ के आदेश पर धूम्रलोचन सेना लेकर देवी को बंदी बनाने आया। देवी ने एक हुंकार मात्र से उसे भस्म कर दिया।
यह अध्याय देवी की अपार शक्ति का परिचय देता है। इसके बाद शुम्भ ने चण्ड और मुण्ड को भेजा — जो अगले अध्याय में परास्त हुए।
दुर्गा सप्तशती · 6 / 13