📖 मार्कंडेय पुराण — दुर्गा सप्तशती
श्लोक 1
चण्ड उवाच ।
अहो रूपमिदं दिव्यं एकाकिन्याः स्थितं वने ।
इयं शुम्भस्य भार्याऽऽस्तां मम वा बलशालिनः ॥
अहो रूपम् इदम् दिव्यम्
अरे, यह रूप दिव्य है
शुम्भस्य भार्या
शुम्भ की पत्नी
चण्ड ने देवी को देखकर मुण्ड से कहा — यह अकेली देवी कौन है? इसे शुम्भ के लिए ले चलो।
श्लोक 2
ततो ऽभ्यधावतां देव्यां चण्डो मुण्डश्च दानवौ ।
सशरासनसंयुक्तौ खड्गशक्तिधरौ तदा ॥
सशरासनसंयुक्तौ
धनुष-बाण सहित
खड्गशक्तिधरौ
खड्ग और शक्ति-अस्त्र लिए
चण्ड और मुण्ड धनुष-बाण और खड्ग लेकर देवी की ओर दौड़े।
श्लोक 3
ततः कोपं चकारोच्चैः अम्बिका तानरीन् प्रति ।
तस्याश्चण्डाटहासभयंकरो वदनाद् बभूव ॥
वदनात् बभूव
मुख से प्रकट हुआ
देवी अम्बिका क्रोधित हो गईं। उनके मुख से भयंकर अट्टहास प्रकट हुआ।
श्लोक 4
काली करालवदना विनिष्क्रान्ता तदाम्बिकाः ।
खड्गमादाय पाशं च विचचार महाहवे ॥
काली करालवदना
काली — विकराल मुख वाली
अम्बिकाः
अम्बिका के भाल से
खड्गम् आदाय पाशम्
खड्ग और पाश लेकर
विचचार महाहवे
युद्धभूमि में विचरने लगीं
देवी के भाल से माँ काली प्रकट हुईं — विकराल मुख वाली, खड्ग और पाश लिए, रणभूमि में विचरने लगीं।
श्लोक 5
चण्डं गृहीत्वा केशेषु मुण्डं चापि महासुरम् ।
खड्गेन पातयामास तयोः शीर्षे महाहवे ॥
चण्डम् गृहीत्वा केशेषु
चण्ड को केशों से पकड़कर
खड्गेन पातयामास
खड्ग से गिरा दिया
तयोः शीर्षे
दोनों के शीर्ष
माँ काली ने चण्ड और मुण्ड — दोनों को परास्त किया। यही उनकी चामुण्डा के नाम से प्रसिद्धि का कारण बना।
श्लोक 6
चामुण्डेति ततो लोके ख्याता देवी भविष्यसि ।
चण्डमुण्डावनयोस्त्वया हतौ महासुरौ ॥
चामुण्डा इति
चामुण्डा नाम से
लोके ख्याता
संसार में विख्यात
देवी ने काली से कहा — चण्ड और मुण्ड का वध करने के कारण तुम संसार में चामुण्डा के नाम से विख्यात होओगी।
श्लोक 7
एवमुक्ता तु सा देवी चामुण्डा प्रीतमानसा ।
नानाशस्त्रैः सुसंपन्ना बभूव युद्धकाम्यया ॥
एवमुक्ता
इस प्रकार कहे जाने पर
नानाशस्त्रैः
अनेक शस्त्रों से
युद्धकाम्यया
युद्ध की इच्छा से
देवी चामुण्डा प्रसन्न हो गईं। वे अनेक शस्त्र लेकर युद्ध के लिए तत्पर रहीं।
श्लोक 8
ततः शुम्भो ऽतिसंक्रुद्धः सेनापतिवधं श्रुत्वा ।
प्रेषयामास रक्तबीजं दैत्यसेनापतिं तदा ॥
सेनापतिवधं श्रुत्वा
सेनापतियों के वध का समाचार सुनकर
अतिसंक्रुद्धः
अत्यंत क्रोधित
दैत्यसेनापतिम्
दैत्यों का सेनापति
चण्ड और मुण्ड के वध का समाचार सुनकर शुम्भ अत्यंत क्रोधित हुआ। उसने रक्तबीज नामक दैत्य को भेजा।
संदर्भ
मार्कंडेय पुराण के अनुसार, सप्तम अध्याय में चण्ड-मुण्ड वध की कथा है। देवी के भाल से माँ काली प्रकट हुईं और उन्होंने चण्ड व मुण्ड को परास्त किया। इसी कारण वे चामुण्डा कहलाईं।
यह अध्याय देवी के अनेक रूपों की शक्ति दिखाता है। अम्बिका, काली, चामुण्डा — सब एक ही परमशक्ति के स्वरूप हैं।
दुर्गा सप्तशती · 7 / 13