यह गीता के सबसे मधुर श्लोकों में से एक है। कृष्ण कहते हैं — जो व्यक्ति बिना किसी और में मन लगाए, निरंतर मेरा स्मरण करता है, उसके लिए मैं सुलभ हूँ — अर्थात आसानी से मिल जाता हूँ।
"सुलभः" — कितना प्यारा शब्द है! भगवान स्वयं कह रहे हैं कि मैं कठिन नहीं हूँ, मैं दुर्लभ नहीं हूँ — जो मुझे सच्चे दिल से याद करता है, उसके लिए मैं आसान हूँ। जैसे माँ अपने बच्चे के लिए हमेशा पास होती है — बच्चे को बस पुकारना होता है।
लेकिन शर्त एक ही है — "अनन्यचेताः" और "सततम्" — मन कहीं और न भटके, और यह स्मरण निरंतर हो। रोज़ सुबह-शाम भगवान को याद करना, काम करते हुए भी मन में उनका नाम रखना — बस इतना करना है।