कृष्ण ने रथ को भीष्म, द्रोण और सभी राजाओं के सामने लाकर खड़ा कर दिया। फिर उन्होंने अर्जुन से कहा — "हे पार्थ! देखो, यहाँ एकत्र हुए इन कुरुवंशियों को देखो।"
कृष्ण का यह कहना बड़ा अर्थपूर्ण है। वे केवल 'शत्रु' नहीं कहते, बल्कि 'कुरु' कहते हैं — अर्थात तुम्हारे अपने कुल के लोग। कुछ विद्वान मानते हैं कि कृष्ण जानबूझकर यह शब्द चुनते हैं ताकि अर्जुन को वास्तविकता दिखे कि यह कोई बाहरी शत्रु से युद्ध नहीं, अपने ही परिवार से संघर्ष है।
रथ को भीष्म और द्रोण के ठीक सामने खड़ा करने का भी गहरा अर्थ है — ये दोनों अर्जुन के सबसे श्रद्धेय गुरु और पितामह हैं। कृष्ण मानो अर्जुन की परीक्षा ले रहे हैं — या शायद उन्हें उस अनुभव से गुज़ारना चाहते हैं जो आगे चलकर ज्ञान का द्वार खोलेगा।