यह गीता के सबसे व्यावहारिक श्लोकों में से एक है। कृष्ण कहते हैं — इसलिए हर समय मेरा स्मरण करो और अपना कर्तव्य (युद्ध) भी करो। अपने मन और बुद्धि मुझमें अर्पित कर दो — तो निश्चित ही तुम मुझे प्राप्त होगे।
ध्यान दीजिए — कृष्ण यह नहीं कहते कि सब कुछ छोड़कर बस ध्यान करो। वे कहते हैं — "मामनुस्मर युध्य च" — मुझे याद करो और अपना काम भी करो। जैसे माँ रसोई में खाना बनाते हुए भी भगवान का नाम लेती रहती है, जैसे किसान खेत में काम करते हुए राम-नाम जपता है — वैसे ही कर्म और भक्ति दोनों साथ-साथ चलें।
यह श्लोक बताता है कि भक्ति के लिए संसार छोड़ने की ज़रूरत नहीं — संसार में रहकर, अपना कर्तव्य करते हुए, मन से भगवान को याद करते रहो।