इस श्लोक में कहा गया है कि मनुष्य का अधिकार केवल कर्म करने में है, उसके फल में नहीं। जैसे एक किसान खेत में बीज बोता है, मिट्टी तैयार करता है, पानी देता है — लेकिन फ़सल कब और कितनी आएगी, यह बारिश, मौसम और प्रकृति पर निर्भर करता है। किसान का काम है मेहनत करना, बाक़ी प्रकृति पर छोड़ देना।
भगवान कृष्ण यहाँ यह भी कहते हैं कि फल की इच्छा को कर्म का कारण मत बनाओ। जब हम सिर्फ़ इनाम की लालसा से काम करते हैं, तो काम में मन नहीं लगता और निराशा जल्दी आती है। जो बच्चा पढ़ाई इसलिए करता है कि सीखने में आनंद है, वह ज़्यादा सीखता है उस बच्चे से जो सिर्फ़ नंबरों के लिए पढ़ता है।
साथ ही यह भी कहा गया है कि कर्म न करने की तरफ़ भी मन मत लगाओ। आलस्य कोई समाधान नहीं है। मनुष्य को अपना कर्तव्य पूरी लगन से करते रहना चाहिए।