अर्जुन कहते हैं — "हे केशव! मुझे चारों ओर अशुभ संकेत दिखाई दे रहे हैं। और मुझे युद्ध में अपने लोगों को मारकर कोई भलाई नहीं दिखती।" अब अर्जुन का दुख शारीरिक से आगे बढ़कर नैतिक स्तर पर पहुँच गया है।
'विपरीतानि निमित्तानि' — अशुभ संकेत। प्राचीन काल में युद्ध से पहले शकुन देखने की परंपरा थी। अर्जुन को अपशकुन दिख रहे हैं — यह उनके भीतरी विक्षोभ का बाहरी प्रतिबिंब भी हो सकता है। जब मन दुखी होता है तो हर बात में अमंगल दिखने लगता है।
फिर अर्जुन सीधा प्रश्न उठाते हैं — अपनों को मारकर क्या भलाई होगी? यह एक ऐसा प्रश्न है जो हर युग में प्रासंगिक है — क्या कोई जीत इतनी बड़ी हो सकती है कि अपनों को खोने की क़ीमत चुकाई जाए?