अर्जुन अपनी शारीरिक दशा बताते हैं — "मेरे सारे अंग ढीले पड़ रहे हैं, मुँह सूख रहा है, पूरा शरीर काँप रहा है और रोंगटे खड़े हो रहे हैं।" ये सब लक्षण गहरे भावनात्मक आघात के हैं।
जैसे किसी को अचानक कोई बहुत बुरी ख़बर मिले तो उसके हाथ-पैर काँपने लगते हैं, गला सूखता है, शरीर में अजीब-सी सिहरन होती है — ठीक वैसा ही अर्जुन के साथ हो रहा है। यह कोई साधारण भय नहीं है — अर्जुन ने सैकड़ों युद्ध लड़े हैं और कभी नहीं काँपे। यह काँपना अपनों को मारने की कल्पना से उत्पन्न हो रहा है।
रोमहर्ष — रोंगटे खड़ा होना — यह भय, विस्मय या गहरी भावना का शारीरिक चिह्न है। अर्जुन के पूरे शरीर ने मानो कह दिया है कि 'मैं इस युद्ध के लिए तैयार नहीं हूँ।'