इस श्लोक में संजय धृतराष्ट्र को पांडव पक्ष के और वीरों के नाम बताते हैं। काशिराज बड़े कुशल धनुर्धारी हैं, शिखण्डी महारथी योद्धा हैं, धृष्टद्युम्न पांचाल देश के सेनापति हैं, राजा विराट हैं जिनके यहाँ पांडवों ने अज्ञातवास बिताया था, और सात्यकि हैं जो यादव कुल के अजेय वीर हैं।
ये सब नाम सुनकर ऐसा लगता है जैसे कोई बड़ा-बूढ़ा अपने गाँव के बहादुर लोगों को गिना रहा हो — एक-एक नाम में एक कहानी छिपी है। हर योद्धा अपने-आप में प्रसिद्ध है और उसका युद्ध में होना पांडव सेना की ताक़त बताता है।
संजय जानबूझकर ये नाम गिनाते हैं ताकि धृतराष्ट्र समझ सकें कि पांडव पक्ष कमज़ोर नहीं है। यह वर्णन रणभूमि की गंभीरता को और गहरा करता है।