संजय बताते हैं कि राजा द्रुपद, द्रौपदी के पाँचों पुत्र और महाबाहु अभिमन्यु — इन सबने अलग-अलग अपने शंख बजाए। शंख बजाना युद्ध की तैयारी का संकेत है, जैसे आज की सेनाओं में बिगुल बजता है।
ध्यान दें कि अभिमन्यु को 'महाबाहु' कहा गया है — अर्थात कम उम्र में भी वे बड़े बलशाली और पराक्रमी थे। अर्जुन और सुभद्रा का यह पुत्र आगे चलकर चक्रव्यूह में अपनी अद्भुत वीरता दिखाता है।
इस श्लोक से पांडव पक्ष के शंखनाद का वर्णन पूरा होता है। चारों ओर से उठती शंखों की ध्वनि ने पूरी रणभूमि को गुंजा दिया।