इस श्लोक में भगवान कृष्ण कहते हैं कि जब-जब संसार में अच्छाई कम होती है और बुराई बढ़ जाती है, तब-तब वे स्वयं प्रकट होते हैं। जैसे जब घर में बहुत अँधेरा हो जाए तो कोई न कोई दीया ज़रूर जलाता है — वैसे ही जब संसार में अन्याय बहुत बढ़ जाता है, तो भगवान आते हैं।
यह बात बड़ी सरल है। बच्चे जब मुश्किल में होते हैं, तो माँ-बाप आकर उनकी मदद करते हैं। ठीक उसी तरह, जब सारी दुनिया परेशान होती है, तो भगवान किसी-न-किसी रूप में आकर सहारा देते हैं।
परंपरा में इस श्लोक को अवतार सिद्धांत का मूल माना जाता रहा है। इसमें बताया गया है कि ईश्वर का संसार में आना कोई एक बार की बात नहीं, बल्कि यह ज़रूरत के अनुसार बार-बार होता रहा है।