यह श्लोक गीता 4.7 का अगला भाग है। पिछले श्लोक में कृष्ण ने कहा था कि जब-जब धर्म की हानि होती है, तब-तब मैं प्रकट होता हूँ। इस श्लोक में वे बताते हैं कि उनके आने का उद्देश्य क्या है — अच्छे लोगों की रक्षा करना, बुरे लोगों का नाश करना, और धर्म को फिर से स्थापित करना।
इसे ऐसे समझो — जैसे गाँव में जब चोर बहुत बढ़ जाते हैं तो पुलिस आती है। पुलिस का काम है भले लोगों को बचाना और चोरों को पकड़ना। भगवान भी यही करते हैं, लेकिन बहुत बड़े पैमाने पर — पूरे संसार के स्तर पर।
सबसे सुंदर बात है अंतिम शब्द — 'युगे युगे'। भगवान एक बार नहीं, बार-बार आते हैं। जब भी ज़रूरत होती है, वे किसी-न-किसी रूप में प्रकट हो जाते हैं। यह संदेश बड़ा आश्वासनकारी है — बुराई कितनी भी बढ़े, भगवान आएँगे।