भगवान यहाँ एक बड़ी बात कहते हैं — मेरी शरण में जो भी आए — स्त्री हो, वैश्य हो, शूद्र हो, यहाँ तक कि जिन्हें 'पापजन्म' कहा जाता था — वे सब परम गति पाते हैं।
यह उस युग में एक समावेशी वचन था। भक्ति का मार्ग किसी जन्म या जाति से बंधा नहीं है — यह भगवान स्वयं कह रहे हैं।