भगवान कहते हैं — जब पापजन्म वाले भी परम गति पाते हैं, तो जो पुण्यशाली ब्राह्मण और राजर्षि भक्त हैं — उनके बारे में क्या कहना। उनके लिए तो यह मार्ग और भी सुलभ है।
फिर भगवान एक सीधी बात कहते हैं — 'अनित्यमसुखं लोकम्' — यह जगत नाशवान और सुखहीन है। इसे पाकर भी मुझे भजो। यह श्लोक भक्ति का निमंत्रण है — आग्रह नहीं।