कृष्ण कहते हैं — कुछ लोग ज्ञान-यज्ञ से मेरी उपासना करते हैं। कोई एकत्व के भाव से — यानी सब में एक को देखकर। कोई अलग-अलग रूपों में। कोई अनेक प्रकार से।
यह श्लोक बताता है कि परमात्मा तक पहुँचने के रास्ते एक नहीं हैं। ज्ञान-मार्ग, भक्ति-मार्ग, अद्वैत-दृष्टि, बहुदेव-पूजा — सभी उसी एक की ओर जाते हैं।