यह इस अध्याय का सबसे महत्वपूर्ण श्लोक है। कृष्ण कहते हैं — जो व्यक्ति अंतिम समय में मुझे याद करते हुए शरीर छोड़ता है, वह मुझे ही प्राप्त होता है। इसमें कोई संदेह नहीं।
इसे ऐसे समझें — जब कोई बच्चा सोते समय माँ का नाम लेता है, तो सुबह उठते ही सबसे पहले माँ ही दिखती है। वैसे ही, जो अंतिम साँस में भगवान का नाम लेता है, वह भगवान के पास ही पहुँचता है। यह बात कृष्ण पूरे विश्वास के साथ कह रहे हैं — "नास्त्यत्र संशयः" — इसमें ज़रा भी संदेह नहीं।
यह श्लोक बताता है कि मृत्यु के क्षण में मन की दशा कितनी महत्वपूर्ण है। इसीलिए हमारे बड़े-बुज़ुर्ग कहते हैं — रोज़ भगवान का नाम लो, ताकि अंतिम समय में भी वही नाम होठों पर आए।