अब कृष्ण "कृष्ण गति" — अंधकार का मार्ग — बता रहे हैं। धुआँ, रात, कृष्ण पक्ष, और दक्षिणायन के छः मास — यह अंधकार का मार्ग है। इस मार्ग से जाने वाला योगी चन्द्रलोक को प्राप्त करके फिर लौट आता है अर्थात पुनर्जन्म लेता है।
उपनिषदों में इसे "पितृयान मार्ग" कहा गया है — पितरों का मार्ग। जो लोग शुभ कर्म करते हैं पर ब्रह्मज्ञान नहीं रखते, वे इस मार्ग से स्वर्गलोक तक जाते हैं, वहाँ पुण्य का फल भोगते हैं, और फिर पृथ्वी पर लौट आते हैं।
यह कोई बुरा मार्ग नहीं है — पर यह अंतिम मुक्ति नहीं देता। जैसे किराए के अच्छे मकान में रहना सुखद तो है, पर वह अपना घर नहीं है।