इस श्लोक में भगवान कृष्ण एक बहुत सुंदर उपमा देते हैं। वे कहते हैं — जैसे एक माला में बहुत से मोती होते हैं और सब एक धागे में पिरोए होते हैं, वैसे ही यह सारा संसार मुझमें गुँथा हुआ है। धागा दिखाई नहीं देता, लेकिन वही सब मोतियों को जोड़कर रखता है।
यह उपमा इसलिए सुंदर है क्योंकि दादी जब माला बनाती हैं, तो सबसे पहले धागा लेती हैं। बिना धागे के मोती बिखर जाएँगे। वैसे ही बिना भगवान के यह सारी सृष्टि बिखर जाएगी। वे वह अदृश्य शक्ति हैं जो सब कुछ जोड़कर रखती है।
पहले भाग में कृष्ण कहते हैं कि मुझसे परे कुछ भी नहीं है — कोई शक्ति, कोई सत्ता, कोई तत्व ऐसा नहीं जो मुझसे ऊपर हो। यह परमात्मा की सर्वश्रेष्ठता का सीधा और स्पष्ट वचन है।