अध्याय 7 का अंतिम श्लोक। कृष्ण कहते हैं — जो मुझे अधिभूत, अधिदैव और अधियज्ञ सहित जानते हैं, वे युक्त मन से मृत्यु के समय भी मुझे जानते हैं।
अधिभूत यानी भौतिक जगत में मेरा स्वरूप; अधिदैव यानी देव-जगत में; अधियज्ञ यानी यज्ञ में। जो इन तीनों स्तरों पर मुझे पहचान लेता है — उसका ज्ञान इतना पक्का है कि मृत्यु के क्षण में भी नहीं डिगता।
मृत्यु की बात सुनकर डरने की जरूरत नहीं। यह श्लोक आश्वासन देता है — जिसने जीते-जी जान लिया, उसे अंत में भी याद रहेगा। यह 8वें अध्याय का द्वार खोलता है।