कृष्ण कहते हैं — जो लोग बुढ़ापे और मृत्यु से मुक्ति के लिए मेरी शरण लेकर प्रयत्न करते हैं, वे ब्रह्म को, अध्यात्म को और समस्त कर्म को जान लेते हैं।
बुढ़ापा और मृत्यु — ये हर इंसान के जीवन की सच्चाई हैं। जो इनसे घबराता नहीं, बल्कि इन्हें देखकर परमात्मा की ओर मुड़ता है — वही सच्चा साधक है। जैसे दीपक की रोशनी में सब कुछ दिखाई देता है — कृष्ण के आश्रय में ब्रह्म, अध्यात्म, कर्म — सब स्पष्ट होता है।
यह श्लोक 7.28 के बाद का अगला कदम है — द्वंद्व-मुक्त भक्त क्या जानता है? ब्रह्म, अध्यात्म, कर्म — तीनों।