भगवान कृष्ण यहाँ अर्जुन से कह रहे हैं — बेटा, अपना मन मुझमें लगा और मेरे आश्रय में आ जा। जैसे एक बच्चा दादा-दादी की गोद में बैठकर कहानी सुनता है — बिना किसी शक के, पूरे भरोसे के साथ — वैसे ही तू मेरी शरण में आ।
'असंशयं समग्रम्' — यानी पूरी तरह, बिना एक भी संशय के। जो मन बिना शक के लग जाता है, वह मुझे पूरा जान लेता है। आधे मन से की गई पढ़ाई कभी पूरी नहीं होती।
यह श्लोक सातवें अध्याय का पहला श्लोक है। यहाँ कृष्ण वादा करते हैं — तू बस मेरी शरण में आ, मैं तुझे सब बताऊँगा। शिष्य में श्रद्धा और गुरु में आश्रय — यही ज्ञान का द्वार है।