कृष्ण यहाँ सात प्रकार के लोगों की सूची देते हैं — शुभचिंतक, मित्र, शत्रु, तटस्थ, बीच का, द्वेष करने वाला, बंधु। इन सबमें जो समान भाव रखे — अच्छे लोगों में भी, बुरे लोगों में भी — वही विशिष्ट योगी है।
यह बड़ी कठिन बात है। हम स्वाभाविक रूप से मित्र से प्रेम करते हैं और शत्रु से दूर रहते हैं। लेकिन कृष्ण कह रहे हैं — जब बुद्धि इस भेद से ऊपर उठ जाए, तब वह समबुद्धि बन जाती है। यही विशेषता है।