अर्जुन बड़े विश्वास से कहता है — हे कृष्ण, इस संशय को पूरी तरह काट दो। पूरी तरह — 'अशेषतः' — कोई बाकी न बचे। और फिर वह कहता है — आपके सिवा इस संशय को काटने वाला कोई नहीं।
यह एक शिष्य की सुंदर भावना है — गुरु पर पूर्ण भरोसा। कृष्ण के पास ही उत्तर है — यह विश्वास है। और इसी विश्वास के बाद कृष्ण का उत्तर आता है जो बहुत आश्वासन देने वाला है।