यह कृष्ण का सबसे आश्वस्त करने वाला वचन है। अर्जुन को तीन श्लोकों में डर था — अधूरा योगी नष्ट तो नहीं हो जाता? कृष्ण बड़े प्यार से कहते हैं — न इस लोक में उसका नाश है, न परलोक में। जो भला करने की नीयत रखता है — उसे कोई बुरी गति नहीं मिलती।
'तात' — यह शब्द देखो। कृष्ण अर्जुन को 'तात' — प्रिय पुत्र — कहते हैं। बड़े स्नेह और भरोसे से कह रहे हैं — घबराओ मत। अच्छी नीयत से किया गया प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता।