कृष्ण अधूरे योगी का मार्ग बताते हैं। वह पहले पुण्यात्माओं के उच्च लोकों में जाता है और वहाँ बहुत वर्ष सुख से रहता है। फिर पृथ्वी पर लौटता है — पर किस घर में? शुद्ध और समृद्ध कुल में। यह कोई दंड नहीं — यह अगली सीढ़ी है।
यह बहुत सुंदर आश्वासन है। अधूरा प्रयास व्यर्थ नहीं गया। वह प्रयास संस्कार बन गया। अगले जन्म में अच्छे घर में जन्म — ताकि फिर साधना शुरू हो सके।