कृष्ण कहते हैं — सच्चा संन्यासी वह है जो न किसी चीज़ से नफ़रत करता है, न किसी चीज़ की लालसा रखता है। वह कपड़े नहीं छोड़ता, घर नहीं छोड़ता — बस मन की दौड़ रोक लेता है।
जैसे एक बुज़ुर्ग दादी जिन्हें न किसी से जलन है, न किसी चीज़ की माँग — वे घर में रहते हुए भी बड़े हल्के मन की होती हैं। यही निर्द्वंद्वता है। ऐसे मनुष्य को बंधन सरलता से नहीं जकड़ पाते।