कृष्ण एक गहरी बात कहते हैं — परमात्मा न लोगों के लिए कर्तापन बनाते हैं, न कर्म, न कर्म और फल का संयोग। यह सब प्रकृति अपने आप करती है।
जैसे सूर्य अपनी रोशनी से खेत को गर्माता है — पर वह यह नहीं करता कि किस खेत में क्या उगे। सूर्य बस चमकता है। प्रकृति बाकी काम करती है। ऐसे ही परमात्मा सबमें व्याप्त है — पर किसी के कर्म का कर्ता नहीं।