कृष्ण कहते हैं — मन को जीतने वाला देहधारी मन से सभी कर्मों को त्यागकर नौ द्वारों के इस नगर (शरीर) में सुखपूर्वक रहता है। वह न स्वयं कुछ करता है, न किसी से करवाता है।
शरीर के नौ द्वार हैं — दो आँखें, दो कान, दो नाक के छिद्र, एक मुख, और दो अन्य। यह नगर है हमारा शरीर। जो इस नगर का स्वामी बन जाए — जो मन से सब कर्म ईश्वर पर छोड़ दे — वह इसी शरीर में सुख से रहता है।