यह चौथे अध्याय का अंतिम श्लोक है। कृष्ण का यह आह्वान बहुत शक्तिशाली है। वे कहते हैं — इसलिए, अपने हृदय में अज्ञान से जन्मे इस संशय को ज्ञान की तलवार से काटो। योग में लगो। उठो, हे भारत! यह 'उठो' केवल अर्जुन के लिए नहीं — हर उस मनुष्य के लिए है जो भीतरी भ्रम में फँसा बैठा है।
पूरा अध्याय ज्ञान, यज्ञ, कर्म और संशय की बात करता है। और अंत में एक ही संदेश — संशय को काटो और उठ खड़े हो।