अध्याय के समापन की ओर कृष्ण उस व्यक्ति को याद करते हैं जिसने तीन काम किए — योग से कर्मों को समर्पित किया, ज्ञान से संशय काटा, और आत्मा में स्थिर रहा। ऐसे व्यक्ति को कर्म नहीं बाँधते। जैसे पका हुआ आम पेड़ से बिना खींचे गिर जाता है — कोई जोर नहीं लगाना पड़ता।
योग, ज्ञान और आत्म-स्थिति — ये तीनों एक साथ मुक्ति का आधार बनते हैं। यह अध्याय का निष्कर्ष है।