कृष्ण तीन प्रकार के व्यक्तियों का उल्लेख करते हैं जो भटकते हैं — अज्ञानी, श्रद्धाहीन और संशयी। इनमें से सबसे कठिन अवस्था संशयी की है। जो हर बात में शक करता रहे — न इधर, न उधर — वह न यहाँ सुखी है, न कहीं और। जैसे दो नावों पर पाँव रखने वाला डूबता है।
संशय बुद्धि का दोष नहीं, बल्कि कभी-कभी स्वाभाविक है — लेकिन जब संशय स्थायी हो जाए, तो प्रगति रुक जाती है।