कृष्ण तीन गुण बताते हैं जो ज्ञान पाने के लिए चाहिए — श्रद्धा, तत्परता और इन्द्रिय-संयम। जो इन तीनों से युक्त है, वह ज्ञान पाता है और शीघ्र ही परम शांति को प्राप्त होता है। जैसे जो बीज को सही मिट्टी, पानी और धूप दे — फसल जल्दी आती है।
यहाँ 'अचिरेण' यानी शीघ्र — यह शब्द आशावान है। सही तैयारी हो तो ज्ञान देर नहीं लगाता।