कृष्ण कहते हैं — इस संसार में ज्ञान के समान पवित्र करने वाला कुछ और नहीं है। और यह ज्ञान योग में सिद्ध हुआ व्यक्ति समय के साथ अपने भीतर ही खोज लेता है — किसी और के पास जाने की ज़रूरत नहीं। जैसे मिट्टी के भीतर पानी होता है, कुआँ खोदने पर मिल जाता है।
यह आशा का वचन है — ज्ञान बाहर से नहीं आता, भीतर ही छुपा है। साधना उसे प्रकट करती है।