यह श्लोक गुरु-शिष्य परम्परा का सार है। कृष्ण कहते हैं — उस ज्ञान को प्रणाम से, जिज्ञासु प्रश्नों से और निष्कपट सेवा से जानो। जो तत्त्व को जानते हैं, वे ज्ञानी गुरु तुम्हें वह ज्ञान देंगे। जैसे एक प्यासा जब कुएँ के पास झुककर, रस्सी से बाल्टी डालकर, पानी माँगता है — तो पानी मिलता है। अहंकार से माँगने पर नहीं।
प्रणाम, प्रश्न और सेवा — ये तीन शिष्य के गुण हैं। ये तीनों एक साथ हों तभी ज्ञान उतरता है।