कृष्ण कहते हैं — जो ज्ञान तुम्हें मिलेगा, उसके बाद मोह फिर नहीं आएगा। उस ज्ञान से तुम सब प्राणियों को पहले अपने भीतर और फिर मुझमें देखोगे। यह कोई दर्शनशास्त्र की बात नहीं — यह एक अनुभव की बात है। जैसे जब आँख खुलती है तो अँधेरा अपने आप चला जाता है।
सब प्राणियों में स्वयं को देखना — यह एकता का बोध है। इसी से करुणा जन्मती है और मोह-ममता का भेद मिटता है।