कृष्ण कहते हैं — ये सभी अनेक प्रकार के यज्ञ ब्रह्म के मुख से — यानी वेदों से — निकले हैं। ये सब कर्म से ही उत्पन्न हैं। यह जानकर कि ज्ञान से ये सब कर्म विमुक्त हो जाते हैं — तुम भी मुक्त होओगे।
ब्रह्मणो मुखे — यह 'वेद' का ही दूसरा नाम है। शास्त्रों में बताए सभी मार्ग कर्म की भूमि पर खड़े हैं, और ज्ञान उन सबको पार करने की चाबी है।